बड़ी बेहेन की गर्मी करी ठंडी और गांड पे तेल लगाके करी चुदाई

मेरा नाम विशाल है और हम लोग घर में 4 सदस्य रहा करते थे। जिनमे मै और मेरी बेहेन और मेरे मम्मी पापा थे। मेरो बेहेन का नाम मुस्कान थे सभी लोग उसे प्यार से मुस्कु कहकर बुलाया करते थे। मेरी बेहेन मुझसे बड़ी थी इसलिए मै उन्हें मुस्कु दीदी कहकर बुलाया करता था। मुस्कु दीदी उम्र में मुझसे 3 साल बड़ी थी। दीदी के बूब्स भी बहुत बड़े बड़े और मुलायम थे और जब भी दीदी मुझे प्यार से गले लगाया करती थी मै उनके बूब्स में मुह्ह डाल लिए करता था। 

दीदी दिन पे दिन और भी सेक्सी होती जा रही थी और इलाके के सभी लड़के मेरी दीदी के पीछे लगे रहते थे। एक दिन की बात है मै और दीदी सोफे पर बैठकर टीवी देख रहे थे की मेरा पैर गलती से दीदी की योनि पर जा पंहुचा। पर दीदी ने मुझे एक नजर  और मेरे पैर का अंगूठा अपनी चूत में दबाने लगी। 

 यह घटना से मै बहुत ही ज्यादा चौक गया था और मेरी हवस भी दीदी को देख कर जाग गयी थी। अगले दिन दीदी जब नहाने के लये अंदर  गई तब मेने दीदी को बहार से देखने की कोशिश करने को सोचा। पर जैसे ही मैने अपने कान दरवाजे की तरफ बढ़ाये मुझे दीदी के करहाने की आवाजे आना शुरू हो गयी। 

जैसे ही मैने दरवाजे के छेद पर अपनी आंख लगाई मेने देखा की दीदी अपनी चूत पे उंगलिआ रगड़े जा रही थी और कामवासना में आहे भर रही थी। अब मै समझ चूक था की दीदी की चूत की गर्मी से वह ये सब कर रही है। 

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दीदी की हवस का उठाया फायदा 

अब मैने दीदी की चूत को ठंडा करने के लिए प्लान बनाना शुरू कर दिआ। मुझे जब भी कोई मौका मिलता मै दीदी को छूने की कोशिश करने लगा। दीदी भी मेरे इशारे समझने लगी थी और मुझे गले लगते वक्त बुरी तरह अपनी छाती से चिपका लिआ करती थी। बहुत कशिश करने के बाद भी मुस्कु दीदी और मै अकेले नहीं हो पा रहे थे। 

अब मेने गुस्से में आते हुए मम्मी को एक नींद की दवाई खाने में मिलके दे दी जिससे वह आराम से सो गहरी नींद में खो गयी। ऊपर कमरे में जाकर में बैठ गया और मुस्कु दी का इन्तजार करने लगा। दीदी निचे का काम करने के बाद अब मेरा कमरा ठीक करने के लिए ऊपर आयी। दीदी को देखते ही मेरा लोडा खड़ा हो गया जिसे दीदी ने मेरे पजामे के ऊपर से ही देख लिआ। 

दीदी झुकते हुए झाड़ू लगा रही थी जिनसे उनके बूब्स पूरी तरह दिख रहे थे। दीदी बार बार मेरे लंड की तरफ ही देखे जा रही थी। अब कुछ देर सफाई करने के बाद दीदी ने मुझे  लिए कहा। मेरा लंड अब पजामे में सीधा हो गए और मेरा पजामा तम्बू की तरह सीधा हो गया। 

दीदी ने मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए मुझसे पूछा की यह की यह क्या है विशाल। मैने दीदी से कहा की यह मेरा लड़कीओ के प्रति प्यार है जो बाहर  आना चाहता है।  मुझसे कहा की क्या यह प्यार उनके लिए भी है क्या। मैने हामी भरते हुए दीदी से कहा की मै उनसे बहुत ज्यादा प्यार करता हु जो इस तरह मेरे लिंग में आ जाता है। 

मैने  दीदी से कहा की आप यह खुद भी देख सकती है की यह प्यार आपके लिए कितना सच्चा है और मै अपना लंड दीदी के सामने ले गया। दीदी ने मेरा पजामा निचे सरकाया और मेरा लंड अपने हाथो में ले लिआ। दीदी मेरा बड़ा और मोटा लंड देख कर बहुत खुश थी। 

दीदी ने मेरा लंड सीधा अपने मुह्ह में लेते हुए चूसना शुरू कर दिआ। दीदी अपनी जीभ मेरे लंड के टोपे पर फिराए जा रही थी जिससे मै बहुत कामुक हो रहा था।  अब मेने दीदी को उठाते हुए उनकी टीशर्ट उतार दी और ब्रा को भी निकल दिआ। 

दीदी के बूब्स बहुत ही मोठे और भूरे रंग के थे। दीदी की निप्पल भी पूरी तरह कड़ी हो गयी थी जिनसे मेने अपने होठो से दबाना शुरू कर दिआ था। दीदी पूरी तरह हवस में खोयी हुई थी और अपनी चूत पर हाथ फिराए जा रही थी। अब मैने दीदी के होठो को चूसना शुरू कर दिआ जिससे दीदी को अजीब सा लग रहा था। 

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दीदी की गांड पे तेल लगाकर करि चुदाई 

दीदी के पजामे में हाथ डालते हुए मेने उनकी चूत को रगड़ना शुरू कर दिआ और उन्हें पूरी तरह गरम भी कर दिआ। दीदी की चूत से पानी बहने लगा था वह मेरा लंड लेने के लिए भी पूरी तरह तैयार थी। अब मेने दीदी के सारे कपडे उतार दिए और दीदी अपनी भीगी हुई चूत  से पर हाथ फिराते हुए मेरे सामने कड़ी थी। अब मैने दीदी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी टाँगे चौड़ी कर दी। 

अपना लंड मेने दीदी की चूत की फांको में फिराना शुरू कर दिआ। दीदी की चुत के छेद पर अपना लंड रखते हुए मेने एक ही झटके में अपना लंड सीसी की चूत में घुसा डाला। धीरे धीरे धक्के देते हुए मेने दीदी की चूत की चुदाई शुरू कर दी। दीदी को भी चुदाई करवाने में मजा आ रहा था। 

दीदी की चूत पर मै अपना लंड तेजी से अंदर बाहर करने लगा। दीदी के मुह्ह से आअह्ह्ह विशाल और तेज की आवाजे निकलने लगी और मै अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ने लगा। दीदी की चूत चोदते हुए अब मुझे काफी समय भी हो गया था। इसलिए मेने दीदी से उनकी गांड मारने के लिए कहा। 

दीदी गांड देने की लिए मान भी गयी और मैने दीदी को घोड़ी बनने के लिए बोल दिआ। दीदी की गांड का छेद बहुत ही छोटा और सूखा था। मैने थोड़ा सा तेल हाथो में लेते हुए दीदी की गांड के छेद पर लगा दिआ। अब मेने अपना लंड दीदी की गांड में डालना शुरू किआ। दीदी की गांड टाइट होने के कारण मेरा लंड बहुत मुश्किल से अंदर गया जिससे दीदी को भी दर्द जो रहा था। 

अब मेने दीदी की गांड में अपना आधा लंड आगे पीछे करते हुए चुदाई चालू कर दी दीदी गांड मरवाने से बहुत ही ज्यादा पागल हो रही थी और अपनी छूट पर हाथ मसले जा रही थी कुछ देर तक दीदी की गांड चोदने के बाद दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिआ और पर मैने चुदाई करना चालू रखी। दीदी की गांड की थोड़ी देर और चुदाई करने के बाद मेरे लंड ने भी जवाब दे दिआ और मेने अपना वीर्य दीदी के मुह्ह में ही झाड़ दिए। 

दीदी अब अगले दिन से खुश रहने लगी और उनकी चूत की गर्मी भी अब दूर हो गयी थी। हमने आगे भी मेने मम्मी के कई बार जाने के बाद अछि चुदाई  का आनंद अपनी बेहेन को दिआ और उसकी चूत को शांत कर दिआ। 

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