ठण्ड में करी बेहेन की चुदाई और चुसाया लंड

मेरा नाम मोहन है दोस्तों और मै बिहार के एक छोटे से जिले से रहता हु।  तो यह किस्सा मेरा और मेरी बेहेन का है जिसकी अब शादी भी हो गयी है। वह मुझसे 2 साल बड़ी थी जिसकी मै हर बात माना करता था। मेरी बेहेन देखने में बहुत सुन्दर व् आकर्षक है जिसको देख कोई भी मर्द पागल हो सकता है।  सर्दिओ का समय था और हम सब एक ही रजाई में सोया करते थे।  दोस्तों मै  आपको बता दू की हम परिवार में 4 ही लोग रहा करते थे। हमारा घर छोटा होने के कारण हम सब साथ में ही एक रजाई में सोया करते थे।  मेरी और दीदी की अच्छी बना करती थी और खुले दिन से एक दूसरे से बाते भी किआ करते थे। 

एक दिन की बात है पापा को गांव से शादी के लिए बुलावा आया और पापा ने मम्मी को भी साथ आने के लिए कहा। दीदी को सारे घर और मेरी जिम्मेदारी देकर  पापा गांव के लिए रवाना हो गए। 

सर्दी का समय था और दीदी और में साथ में ही सोया करते थे। एक रात की बात है सोते सोते दीदी मेरे नजदीक आ गयी और ठंडी लगने की वजह से मुझे जोर से जकड कर सो गयी। मै भी बिना कुछ सोचे समँझे बिना उस दिन सो गया।  अब अगले दिन दीदी फिर से मेरे पास आकर सोने लगी और इस बार मेरा लंड खड़ा खड़ा हो गया।  मुझे अब शर्म आने लगी और मै दूसरी तरफ मुह्ह करके सो गया। अगली सुबह दीदी ने मुझसे बोला,  छोटू कल रात तू दिवार की तरफ मुह्ह करके क्यों सो गया था। मैने चुप रहते हुए बात टाल दी।  अब सोने का वक्त हो गया था और आज दीदी बाकि दिनों से कुछ अलग भी लग रही थी।  

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दीदी ने दबवाये मुझसे अपने नितम्ब 

अब मुझे दीदी को चोदने की इच्छा भी होने लगी थी। अब में बिना सोये दीदी का मेरे पास आने का  लगा और कुछ समय बाद दीदी मेरी तरफ मुड़ी और मुझे पकड़ कर सो गयी। पर इस बार मेरी हवस ने मुझे शर्म नहीं आने दी और मैने भी दीदी को अपनी बाहो में भर लिआ। अब दीदी की साँसे मेरी सासो से मिल रही थी और दीदी मेरे करीब आये जा रही थी। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैने अपना एक हाथ बढ़ते हुए दीदी की ब्रा में डाल दिआ और धीरे धीरे उनके बूब्स को दबाने लगा।  

दीदी मुझे और कस कर पकड़ कर सोने का दिखावा करने लगी।  अब मेरा डर खुल गया था और अब मैने दीदी की बूब्स जोर जोर से मसलना शुरू कर दिए।  दीदी की सांसे लम्बी होने लगी थी और निचे मेरा लंड पूरा सख्त हो गया था। दीदी की आँखे भी अब आधी खुल गयी थी। दीदी के पास जाते हुए मैने दीदी को किस करना शुरू कर दिआ।  अब दीदी ने आँखे खोलते हुए मेरे चुम्बन का जवाब देना शुरू कर दिआ।  

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ठंडी में दीदी ने मरवाई चूत और चूसा लंड 

अब दीदी भी हवस में आ चुकी थी। हम दोनों बिना शर्म किये एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे। दीदी का टॉप सारकाते हुए मैने उनके बूब्स चूसना शुरु किये।  दीदी के बूब्स बहुत ही मुलायम और गोल गोल थे जिनको मैने जिंदगी में पहली बार देखा था। अब दीदी की कामुकता पूरी तरह से बाहर आ चुकी थी।  दीदी ने उठते हुए मेरे लंड को हिलना शुरू कर दिआ और अपने मुह्ह में लेते हुए चूसने लगी।  

अब मुझे बहुत आनंद मिल रहा था और चरमसुख के में बहुत करीब आ गया था।  दीदी ने अब लेटते हुए मुझे उनके ऊपर आने को कहा। मैने दीदी को निचे करते हुए उन्हें किस करना शुरू कर दिआ।  दीदी ने मुझे निचे धक्का देते हुए मेरा मुह्ह अपनी चूत पे लगा दिए और चाटने को बोला।

  दीदी की चूत पर थोड़े बाल थे और एक अजीब सी सुगंध भी आ रही थी।  मेने अब उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिआ जिससे अब दीदी की चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी और लंड लेने के लिए तैयार थी। मैने अपना लंड दीदी की चूत पे रखा और दीदी ने निचे सरकते हुए मेरा लंड आधा चूत में ले लिआ।  अब मैने एक जोर के धक्के से अपना पूरा लंड दीदी की चूत में डाल दिआ और चुदाई शुरू कर दी।  दीदी और मै अब जोर जोर से चुदाई कर रहे थे।  कुछ समय बाद मेरा लंड सख्त हो गया और मैने सारा विर्य दीदी के मुह्ह में देके उन्हें ही पीला दिआ।  उस रात हमने घंटो तक चुदाई करि और आगे भी ऐसे मोके मिलने पर अपनी अपनी हवस मिटाई।  

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