आंटी को ठंडी में गरम करके करि जोरदार चुदाई 

ठंडी का मौसम चल रहा था और हमेशा की तरह इस बार भी दिल्ली में बहुत जोर की ठंडी पड़ रही थी। पर अंदर ही अंदर इस ठंडी में भी मेरे जिस्म की आग ने मुझे परेशान करा हुआ था। 

शुरू से ही मै नंग चीजों  का शौकीन था और मुझमे हवस भी कूट कूट कर भरी हुई थी। इस हवस को शांत करने के लिए कभी कभी में सामने ही रहने वाली मेरी रेखा आंटी का सहारा लिआ करता था। 

 आंटी की चुदाई के सपने देखते हुए मै  अपने लंड को मसलता रहता था जिससे मेरे जिस्म को हवस से थोड़ी बहुत राहत मिल जाती थी। पर ऐसा करते हुए भी मुझे काफी समय हो गया था और अब मुझे मुठी मारने में मजा नहीं आता था। 

अब मेने ठान लिआ की मै आंटी की चुदाई करने की दम लूंगा और मेने अब आंटी से मजे लेने शुरू कर दिए। आंटी से मै रोज बाते करने लगा और उनके घर में भी मेरा आना जाना चालू हो गया था। 

ऐसे ही एक दिन आंटी अंदर टीवी देख रही थी और मेने उन्हें आवाज देते हुए अपने कदम अंदर बडा लिए। अंदर जाके मेने देखा की आंटी कम्बल में मस्त लेटी हुई है और टीवी देख रही है। 

आंटी मुझे देखके हसने लगी क्युकी मै ठंडी से काँप रहा था और उन्होंने मुझे कम्बल में आने  को भी बोला। मेने भी अब मौका पाते हुए अपने आप को कम्बल में घुसा लिआ और मेरे पैर  आंटी से चिपका दिए। 

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आंटी को सदी में कर लिआ गरम 

कम्बल के अंदर अब मेने आंटी के पेरो पर अपने पैर लगते हुए उन्हें सहलाना शुरू कर दिआ और आंटी ने भी मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं कहा। अब मेरी हिमायत बढ़ने लगी थी और मेने अपने पैर  से आंटी की साडी अंदर ही  ऊपर कर दी। 

उनकी नंगी टांगो को सहलाते हुए मै उन्हें पूरी तरह से गरम किये जा रहा था और आंटी भी  मुझे बिना कुछ कहे आराम से टीवी देख रही थी। अब मेने अपने पैर हटाए और हाथ को आंटी की गांड पर रख दिआ। 

आंटी ने मुझे अब भी कुछ नहीं बोला और अब मेरी हिम्मत काफी बढ़ गयी और मेने आंटी की गांड को सहलाना चालू कर दिआ था। आंटी की साडी उनके घुटनो पर आ गयी थी जिसे मेने हाथ से ऊपर करते हुए उनके और भी नंगा कर लिआ। 

अब आंटी की गांड को सहलाते हुए मै काफी प्यार से उन्हें कामुक कर रहा था और अब आंटी ने मुझे एक नजर देखते हुए मुस्कान दी। अगले ही पल आंटी मेरे काफी करीब थी और उनकी गरम सांसे मेरी सांसो से मिलने लगी। 

अब हम दोनों ही चुम्बन में खो गए और बारी बारी से एक दूसरे के होठो को चूसने लग गए। आंटी मेरे होठो को काफो जोर से चूसे जा रही थी और मै भी किस करते हुए उनकी गांड को मसल रहा था। 

गांव में मिली हवस से भरी लड़की

आंटी को चोदा कम्बल के अंदर 

अब आंटी और मै पूरी तरह से हवस से भर गए  थे और  आंटी की गांड से हाथ निकलते हुए मेने उनके बूब्स को दबाना शुरू कर दिआ। अब आंटी का हाथ भी मेरे लंड पर पहुंच गया था जिसे वह प्यार से मसल रही थी। 

आंटी ने बहुत ही आराम से मेरे लंड को मेरे पजामे से बहार भी निकाल लिए और कम्बल के अंदर ही उसे अपने हाथ से ऊपर निचे करने लग गयी। मेरे लंड में अब बहुत जान आ चुकी थी और मै चुदाई  के लिए उतारू था। 

मेने अब कम्बल के आदर ही आंटी की साडी ऊपर करि और पैंटी को साइड में करते हुए चुत के छेद को हाथ से टटोला। लंड को मेने ठीक से छेद में घुसाया और अगले  ही पल मेने जोर जोर के झटको के साथ आंटी को चोदना शुरू कर दी। 

एक  दूसरे के होठो को चूसते हुए हम दोनों चुदाई का मजा ले रहे थे और कम्बल में मेरा लंड आंटी की चुत को अच्छे से चोदे जा रहा था। अब मेने गरम होते हुए कम्बल को हटा दिआ और आंटी के ऊपर आ गया। 

मेने अब बिच में आते हुए आंटी की चुत में वापस से लंड दिआ और चुदाई फिर से करने लग गया जिसके बाद अब आंटी की आहे निकलने लगी थी और आंटी मुझे अपनी तरफ खींचती हुई चुदाई में मदद कर रही थी। 

ठण्ड में यह चुदाई बहुत देर तक चली और जोरदार चुदाई के बाद मेरे लंड से पानी निकल गया जो मेने आंटी की चुत से बाहर ही निकाल फेक दिआ। 

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