टिंडर से चुदाई तक की कहानी मेरी मुह्ह जुबानी – प्यार की बाते 

अपने टिंडर ऐप के बारे में तो सुना ही होगा। टिंडर पर आप नयी नयी लड़कीओ से मिलने और बाते करने के लिए अपनी इच्छा जाता सकते है। यह ऐप लड़के और लड़कीओ दोनों के लिए बना है जहा लड़किआ अपनी अच्छी फोटो डालकर लड़को को रिझाती है। 

तो अब सुनिए मेरी कहानी, मेरा किस्सा भी भी कुछ ही शुरू हुआ था। मै टिंडर पर लड़कीओ को देखा जा रहा था और उने अपने हिसाब से अच्छा बताते हुए टिंडर ऐप में अलग कर रहा था। यु तो मै यह काम सारा दिन ही करता रहता था क्युकी बहुत काम ही लड़कीआ मुझे पसंद करती थी और मेरे मेसेज का रिप्लाई करती थी। 

पर उस दिन शायद मेरी किस्मत कुछ ज्यादा ही अच्छी थी और कविता नाम की लड़की ने मेरे मेसेज का रिप्लाई किआ। कविता की आईडी पर उसका पता मुझे 20 किमी की दुरी पर दिखा रहा था। अब मैने कविता से अचे से बाते करना शुरू किआ और कुछ ही देर बाद मेरी और उसकी अछि जमने लगी। 

कविता ने मुझे उसके बारे में सब बताया और मेने भी उसका जवाब देते हुए अपनी सारी कुंडली उसके सामने खोल दी। यु तो टिंडर पर कोई भी लड़की सेक्स के लिए नहीं आती थी और अगर आप ऐसी बात किसी लड़की से बोल भी देते थे तो वह आपको ब्लॉक  कर देती। इसलिए मेने भी कविता को अपनी हवस नहीं दिखाई और उससे कोई भी उलटी बात नहीं करि। 

 अब हम दोनों को बाते करते हुए 10 दिन बीत गए और हमारी बाते भी अछि तरह होने लगी। की तभी कुछ दिन बाद कविता ने मुझसे कहा की मै बाकि लड़को से बहुत अलग हु। जहा बाकी लड़के बस सेक्स की बाते करते है मै बहुत ही सच्चा और शांत इंसान हु। पर कविता को यह नहीं पता था की मेरी हवस को मैने खुद दबा कर रखा हुआ था। 

पति की कमजोरी और देवर का प्यार | भाभी की चुदाई का खेल

कविता से मिलने का प्लान 

अब कविता और मेरे बिच की प्यार की बाते होने लगी और हम दोनों सारा सारा दिन बाते करने लगे। और कुछ दिन बाद कविता ने मुझे कहा की क्यों न अब मिला जाये। यह मौका मै कैसे छोड़ सकता था इसलिए मेने भी बिना कुछ सोचे कविता की हाँ में हां मिलायी और हम दोनों ने एक दिन मिलने का प्लान बनाया। 

कविता ने मुझे एक पार्क में आने के लिए कहा जहा हम दोनों को मिलना था। अब मिलने का दिन आ गया था और मै समय से पहले पार्क पहुँच गया। कुछ ही समय बाद कविता भी वह आ गयी जो की दिखने में बहुत ही सुन्दर और सेक्सी लग रही थी। कविता की गांड बहुत मोती और उसके टॉप में उसके बूब्स बहुत उभरे हुए दिख रहे थे। 

कविता सीधा मुझसे मिलते हुए मेरे गले लग गयी और बहुत ही खुश हो गयी। अब कविता ने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों ने पार्क में घूमना शुरू कर दिआ। वह पार्क पूरा जोड़ो से भरा हुआ था जहा हर जगह लोग किस कर रहे थे। कविता भी मुझे एक बेंच पर लेकर बैठ गयी और मुझसे कहने लगी की सभी को देखकर उसका दिल भी किस करने को कर रहा है। 

यह बात उसने मजाक में कही पर उसकी इस बात में कुछ राज भी था। हम दोनों काफी देर तक बैठे रहे और कुछ देर बाद कविता मेरी गोद में लेट गयी। उसके गुलाबी होठ मुझे ललचा रहे थे जो की पूरे तरह कविता ने गीले करे हुए थे। अब मेने हिम्मत करते हुए अपने होठ उसकी तरफ बढ़ाये और कविता को किस कर दिआ। 

कविता ने अचानक आँख खोली और चोकते हुए मुझे मेरी किस का जवाब देने लगी। कविता मेरे होठो को पूरी तरह से चूसे जा रही थी और अभी दिन के 11 बजे थे और हम दोनों एक दूसरे का रसपान कर रहे थे। पर यह  सब खुले में करते हुए मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था इसलिए मै कुछ देर बाद ही रुक गया। 

अब कविता ने मुझसे रुकने का कारण पूछा तो मैने उसे बताया की सभी लोग हम दोनों को ही देख रहे थे। कविता ने मुझे कहा की क्यों ना हम लोग होटल का कमरा ले ले और कविता ने मेरा हाथ पकड़ते हुए चलना शुरू कर दिआ। कुछ देर बाद हम दोनों एक होटल में कमरा लेके वही आराम करने लगे। 

पाइये और चुदाई की कहानिआ : Hindi Sex Story

कविता ने खुद दिआ चुदाई करने का मौका 

कमरे में जाते ही कविता ने मुझे अपनी बाहो में भर लिआ और काफी देर तक मुझे वैसे ही प्यार जताती रही। मै भी उसे बाद गले लगाकर प्यार जताता रहा और उसके माथे पर किस करने लगा। पर तभी कविता ने मेरे होठो को अपने होठो से मिलाया और चूमने लगी। कविता मेरे होठो को बुरी तरह चूसे जा रही थी जिससे मेने भी उसके होठो का रसपान शुरू कर दिआ। 

अब कविता ने अपना टॉप खुद उतार दिआ और मेरे दोनों हाथो को अपने बूब्स पर रख दिआ। कविता को किस करते हुए मै उसके बूब्स चूस रहा था और अब हम दोनों बिस्तर पर गरम हो गए थे। मेने भी अपनी शर्ट के सारे बटन खोल  लिए थे और कविता मेरे पूरे जिस्म पर किस करे जा रही थी। 

निचे मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया था जिसे कविता ने मेरी पेंट से आजाद कर दिए। कविता मेरा लंड चूसते हुए मुझे प्यार से देखे जा रही थी और उस समय मै कामवासना में बह चूका था। अब कविता ऊपर आयी और मेने उसकी जींस को उतारकर अलग कर दिआ। हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो गए थे और एक दूसरे से लिपटे हुए थे। 

मेने अपना हाथ कविता की चूत पर लगाया जो की पूरी तरह भीगी हुई थी। कुछ देर तक कविता की सहलाने के बाद मेने उसकी टंगे फैला दी। अब मेने अपना लंड कविता की चूत के मुह्ह पर लगाया और एक ही झटके में मेरा लंड कविता की चूत में घुस गया। पर कविता के मुह्ह से एक भी अहह तक ना निकली और कविता मजे से बिस्तर पर लेती चुदाई के लिए तैयार थी। 

मेने अपना लंड अंदर बाहर करते हुए कविता की चुदाई शुरू कर दी। कविता भी अपनी गांड किसी रंडी की तरह मटका रही थी और मुझसे मजे लेते हुए चुद रही थी। हम दोनों हवस में लम्बी लम्बी सांसे भर रहे थे और कविता अपने चुचे दबाते हुए मेरा लंड अपनी चूत में पिलवायें जा रही थी। 

अब कविता को मेने अपने ऊपर किआ और अपने लंड पर बिठा दिआ। कविता ने मेरे लंड पर अपनी गांड पटकनी शुरू कर दी और मुझसे चुदने लगी। मैने अपने हाथ से कविता की चूत को सहलाना भी शुरू कर दिआ जिससे कविता की आहे निकलने लगी। कविता आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह करती हुए मेरे लंड पर कूद रही थी प्यार से चुद रही थी। 

मै भी निचे से अपनी गांड से पूरा जोर लगा रहा था और अपना पूरा लंड कविता की चूत में घुसाए जा रहा था और कुछ ही देर बाद मेरे लंड से वीर्य निकलने लगा जो मेने कविता की चूत से बाहर गिरा दिआ। पर कविता अभी शांत नहीं हुई थी इसलिए कविता ने मुझे उसकी चूत चाटने के लिए कहा। 

मैने अपनी जीभ को कविता की चूत पर रखा और फैंको के बिच से चाटना शुरू कर दिआ। कविता की चूत पूरी तरह पानी से भीगी हुई थी और पानी भी छोड़ने वाली थी। अब मेने कविता की चूत के दाने पर अपनी जीभ फिरना शुरू की और वह पूरी तरह वासना से पागल हो गयी। 

कविता मेरा मुह्ह अपनी चूत में घुसाने लगी और मेने अपनी जीभ से चूत को और तेजी से चाटना शुरू कर दिआ। तभी कविता की चूत ने एकदम से पानी छोड़ दिए और कविता कुछ ही देर में ढीली होकर बिस्तर पर लेट गयी। 

Leave a Comment