ट्रैन में करि लड़की की चुदाई और लिए झटको से मजे 

मुझे अपने गांव गए बहुत ही ज्यादा दिन हो गए थे। मम्मी पापा ने भी मुझे आज अपने दादा से मिलने के लिए कहा था इसलिए में आज सुबह ही अपना सामान लेके गांव के लिए निकला गया। 

मेरी उम्र ज्यादा नहीं थी इसलिए जवानी के जोश के साथ मेने अपना सामान लिआ और ट्रैन में बैठ गया। अभी  ट्रैन में एक भी सीट खली नहीं थी तो कुछ देर के लिए में खड़ा खड़ा सफर करता रहा। 

पर अब कुछ ही देर बाद एक अंकल अपनी सीट से उठे और ट्रैन से उतर गए। मेने अब यह मौका देखा और सीट पर बैठ गया। पर मेने जैसे ही अपनी सामने सामने वाली सीट पर नजर डाली तो मेने देखा की वह एक लड़की बेठी हुई थी। 

वह दिखने में बहुत ही ज्यादा सुन्दर थी और उसका बदन भी काफी ज्यादा आकर्षक था। अब जैसे ही मै सीट पर बैठा उसने मुझे एक प्यारी सी मुस्कान दी जो की दोस्ती की निशानी थी। 

मेने भी उसे हस्ते हुए देखा और कुछ ही देर बाद हम दोनों बाते करने लगे। 

हमारी उम्र लगभग एक जैसी थी और उसने मुझे बताया की वह अपने परिवार के साथ कही जा रही है पर उनकी सीट बहुत ज्यादा दूर है इसलिए वह यहाँ पर अकेली रह गयी है। 

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लड़की को पटाया अपनी बातो से 

अब हम दोनों साथ में बैठे बाते करने लगे और एक दूसरे के बारे में सब पूछने लगे। हमने धीरे धीरे एक दूसरे की पसनद और नापसंद जान ली और अब शाम का समय हो गया था। 

कुछ देर बाद उसके पापा वह आये और उन्होंने उस लड़की से कहा की अगर वह चाहे तो अपनी मम्मी के साथ सो सकती है। पर उसने अपने पापा से मना कर दिआ और कहा की वह अकेली आराम  से सो जाएगी। 

अब 9 बज चुके थे और हमारी बाते काफी हो चुकी थी। जाने अनजाने में हम दोनों की काफी अछि बन गयी थी और अब वह मेरी बातो में आने लगी थी। मेने उससे उसके बॉयफ्रेंड के बारे में भी पूछा और उसने मुझे बताया की वह  लड़को से अभी मिली नहीं है। 

उसके घर में लड़को से बात करना मना है इसलिए व्हे बहुत अकेली  रहती है। यह सुनकर मेने उसे कहा की आज यह कसर  भी पूरी हो गयी और मै उससे आज पूरी रात बात करता रहूँगा। वह हसी और मेरी हां में हां मिलाने लगी। 

काफी रात हो गयी थी और मौका देखते हुए मेने उससे कहा की क्या उसने कभी किसी को चूमा है ? उसने मुझे मना कर दिआ और मेने उससे अब कहा की क्या यह कसर भी आज मै पूरी कर दू। 

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ट्रैन में मारी झटको से चुत 

वह मेरी बात सुनकर शर्मा गयी और अब मेने उससे थोड़ा अच्छे से पूछा और उसके हां बोलने पर उसक सीट पर लेट गया। हम दोनों एक दूसरे से चुपके हुए थे क्युकी सीट काफी छोटी थी। 

मेने अब प्यार से उसके होठ अपने होठो से मिलाये और चूसने शुरू कर दिए। कुछ ही देर में वह भी गाम हो गयी और मुझे चूमने लग गयी। निचे मेरा एक हाथ उसी के शरीर हो टटोल रहा था और उसके बूब्स को दबाये जा रहा था। 

वह बहुत गरम हो गयी थी और मेने अपना हाथ अब उसकी पजामी दे दिआ जहा उसकी चुत पानी से भीग चुकी थी। मेने अपना हाथ सहलाते हुए उसकी चुत रगड़ी और वह हवस से भर मेरे होठ जोर जोर से चूसने लगी। 

वह अपनी आंखे बंद करते हुए मुझे प्यार कर रही थी और मेरा लंड अब खड़ा हो चूका था। मेने अब उसके कपडे निचे कर दिए और पैर तक ले गया और  उसकी चुत में डाल दी जिससे वो थोड़ी ढीली हो गयी

अब मेने अपना लंड हाथ में लिआ और चुत के छेद पर सेट करते हुए एक जोर के धक्के से अनादर दे दिआ। एक प्यारी से आह के साथ ही मेरा लंड उसकी चुत में घुस गया और मेने चुदाई  करना शुरूकर दी। 

रात की वह से ट्रैन तेज चल रही थी और ट्रैन के झटके अब चुदाई करने में मेरी मदद कर रहे थे। पीछे से उसके बूब्स दबाते हुए मै उसकी चुत में अपना लंड डुए जा रहा था और वह भी चुदाई का पूरा मजा लिए जा रही थी। 

आगे पीछे होते हुए मै अपना लंड चुत में अंदर बाहर कर रहा था और वह भी बहुत प्यार से मेरी उंगलिओ को चूस रही थी। अब चुदाई को काफी देर हो गयी थी और मेरे लंड से आगे ही पल माल निकल गया और मेने चुदाई रोक दी। 

 

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