ट्रैन में सील तोड़ चुदाई का मजा दिआ जवान लड़की ने

हमारा सफर दिल्ली से आगरा तक था। शाम के समय हमारी ट्रैन आने ही वाली थी की हमेशा की तरह इस बार भी ट्रैन लेट हो गयी। कुछ देर रुकने के बाद ट्रैन आयी और हम सब जल्दी से अपनी अपनी सीट पर बैठ गए। हम 3 ही लोग थे इसलिए हम लोग एक तरफ का हिस्सा लेकर बैठ गए। 

कुछ समय बाद एक अंकल और आंटी हमारे सामने वाली सीट पर बैठने ए और उनके साथ आयी उनकी बेटी। हमारा सफर 2 दिन का था इसलिए मुझे अपने ऊपर पूरा भरोसा था की वह मुझसे बात कर ही लेगी। अब शाम का खाना हम सभी लोगो ने ट्रैन में खाया और अपनी अपनी सीट सोने के लिए खोल ली। 

अंकल और आंटी मोटे होने के कारण निचे वाली सीटों पर हो सो गए और उनकी बेटी सबसे ऊपर चढ़कर लेट गयी। मेने भी अपनी सेट सोने के लिए खोली और मम्मी पापा को निचे ही सोने के लिए बोल दिआ। अब वह मेरे सामने ही  फ़ोन चला रही थी और कुछ देर बाद उसने मुझसे इशारा करते हुए फोन का चार्जर माँगा। 

मेने भी प्यार से चार्जर अपने फोन से निकलकर उसे दे दिआ और हम दोनों वापस अपना अपना फोन चलाने लगे। कुछ देर बाद उसने मुझे वापस से इशारा किआ और मेरा नाम पूछा मेने उसे अपना नाम राजू बता दिआ। उसने मुझे अपना नाम रिहाना बताया और एक अछि सी स्माइल दी। 

अब यहाँ से हमारी बाते शुरू हुई और धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे से सारी बाते पूछने लगे। रिहाना के एक बॉयफ्रेंड भी था जिससे वह बहुत प्यार करती थी। उसने मुझे बताया वह अपने बॉयफ्रेंड से परेशान भी है क्युकी वह उसे प्यार करने से मन करता है। 

रात के अब कुछ 2 बज चुके थे और सभी लोग सो गए थे। सभी के सोने के कारण हम दोनों बहुत ही धीरे धीरे बात कर रहे थे। ट्रैन की रफ़्तार भी अब बढ़ चुकी थी और आवाज भी काफी तेज आ रही थी। हम दोनों को बाते करने में अब दिक्कत आने लगी थी इसलिए मै थोड़ा सा रिहाना की तरफ मुह्ह करके अपनी बाते कहने लगा। 

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रिहाना को महसूस कराया अपना लंड 

मुझे वैसे बाते करते हुए देख रिहाना ने मुझे कहा की मै उसकी सीट पर ही आके बात कर लू। रिहाना ने कहा की उसे वैसे भी रात को नींद नहीं आती और वह पतली होने के कारण सीट पर जगह भी ज्यादा नहीं लेगी। मैने पहले चारो तरफ देखा तो सभी लोग  आराम से सो रहे थे इसलिए मेने अपने पैर रिहाना की सीट पर रखे और दूसरी तरफ चला गया। 

अब रिहाना और मेने एक सीट पर एडजस्ट करते हुए अपने आप को ढाला और बाते करने लगे। शुरुआत में रिहाना मुझसे बैठते हुए ही बाते कर रही थी पर कुछ देर बाद करीब 3 बजे रिहाना भी मेरे साथ में ही लेट गयी। अब मेरा लंड रिहाना के घुटनो पर लग रहा था क्युकी रिहाना ने अपने पैर मोड़ रखे थे। 

ट्रैन के हिलने से रिहाना के पैर से मेरे लंड पे रगड़ आ रही थी और ऐसे कुछ ही देर बाद मेरा लंड खड़ा हो गया। रिहाना को कुछ ही देर में यह बात समझ आ गयी पर उसने यह बात नजरअंदाज कर दी। पर अब मेरा लंड कुछ ज्यादा ही अकार ले चूका था और रिहाना भी अपना पैर नहीं हटा रही थी। 

अब कुछ समय बाद रिहाना दूसरी तरफ मुह्ह करके लेट गयी और उसकी मोटी गाडं मेरे लंड पर लिपट गयी। जैसे जैसे ट्रैन हिल रही थी रिहाना की गांड भी मेरे लंड पर धसे जा रही थी। रिहाना भी अपनी गांड मेर लंड पर रगड़ रही थी और यह देखकर मेने अपना हाथ रिहाना के पेट पर रख दिआ।  

रिहाना का चिकना पेट पूरी तरह गरम हो चूका था और और मेरे हाथ से रिहाना भी कामुक होने लगी। मेने अपना हाथ  रिहाना के पेट पर फिराना शुरू कर दिआ और एकदम से मुड़ी और मेरे होठो को चूमना शुरू कर दिआ। रिहाना बुरी तरह से कामुक हो गयी थी और मेरे होठो होठो को अपने होठो से थूक लगाते हुए चूसे जा रही थी। मै भी उसका साथ देता हुआ उसको अपनी तरफ खींच रहा था और चूमे जा रहा था। 

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ट्रैन की तेजी के साथ साथ लिआ चुदाई का मजा 

अब रिहाना की सांसे भी गरम होने लगी और रिहाना मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा हो गया था जिसके ऊपर जैसे से रिहाना ने हाथ फेरा वो और भी ज्यादा बड़ा हो गया। अब रिहाना का हाथ मेने अपने पजामे में डाल दिआ और रिहाना मुझे किस करती हुई लंड को हिलने लगी। 

अब मेने भी अपना हाथ रिहाना के टोप में डाला और उसके चुचो को दबाना शुरू कर दिआ। रिहाना गहरी सांसे लेती हुई अपने बूब्स दबवा रही थी और अब रिहाना ने मुझे उल्टा लेटने के लिए कहा। उल्टा लेटने के बाद रिहाना ने मेरा पजामा निचे किआ और लंड चूसना शुरू कर दिआ। मेने भी रिहाना को देखते हुए उसका पजामा हटाया और चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा। रिहाना और मै एक दूसरे को बुरी तरह से चूसे जा रहे थे और पूरी तरह गरम हो गए थे। अब मेने रिहाना के मुह्ह से अपना लंड निकला और सीधा होकर अपना लंड रिहाना के पीछे से उसकी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा। 

रिहाना ने मेरे लंड को रास्ता दिखाते हुए अपने हाथ में लिआ और अपनी चूत के छेद पर रख दिआ। एक ही धक्के में मेरा लंड चूत के अंदर घुस गया और रिहाना के निप्पल मसलते हुए मेने रिहाना की चूत चोदनी शुरू कर दिआ। रिहाना भी आगे पीछे होती हुई मुझसे जोर जोर से चुदाई ले रही थी। 

ट्रैन की आवाज से साथ हम दोनों अपने धक्के आगे पीछे करते हुए चुदाई कर रहे थे और मुझे भी रिहाना की चुदाई करते हुए उसके चुचे दबाने में बहुत मजा आ रहा था। रिहाना बड़ी बड़ी सांसे भरे जा रही थी और अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह करती हुई चुद रही थी। ट्रैन के शोर से रिहाना की आवाज किसी को भी सुनाई नहीं दे रही थी और हम दोनों जोर जोर से चुदाई करते ही जा रहे थे। 

चुदाई का ये आलम ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रहा था और रिहाना भी पूरी तरह से चुदाई के मजे लेने लग गयी थी। अब मेने अपना हाथ रिहाना की चूत पर रखा और चूत को मसलते हुए अपना लंड तेजी से अंदर बाहर करने लगा। 

रिहाना बुरी तरह से अकड़ने लगी और उसकी चूत को खुद ही अपने हाथ से मसलने लग गयी। झटके से रिहाना की चूत से पानी झड़ना शुरू हो गया और रिहाना भी शांत होने लगी। यह देखते हुए मेने अपना लंड पूरा रिहाना की चूत में अंदर डालते हुए चोदना चालू कर दिआ और कुछ ही देर बाद मेरे लंड से भी पानी की पिचकारी छूट ही गयी। 

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