मै और मेरी चुत की गर्मी की आग – 3 

कुछ पल बाद वो अपने लंड को बाहर निकालकर मुठ मारने लगा। उसके मुँह से ‘रिंकी दीदी … आंह रिंकी दीदी …’ की आवाज सुन कर मैं भी खुद को रोक नहीं पा रही थी। विशु मुठ मारने में पूरी तरह से लीन हो गया था। 

मैं पलक झपकते ही उसके सामने जाकर खड़ी हो गयी। मुझे वहां देखकर उसने फौरन से अपने लंड को अन्दर कर लिया। वो पूरी तरह से घबरा गया था। मैंने कहा- विशु, ये तुम क्या कर रहे थे? विशु- रिंकी दीदी, कुछ नहीं। 

मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी पूरी तरह से तना हुआ था। तो मैंने उसे इशारे से कहा कि विशु से सब क्या है? लेकिन विशु कुछ नहीं बोला। आज मैं ये मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी। 

मैंने कहा- विशु, जरा मैं भी तो देखूँ कि तेरा लंड कितना बड़ा है। ऐसा कहते हुए मैंने उसका लोअर नीचे कर दिया और देखा कि विशु ने अंडरवियर नहीं पहना था इस वजह से उसका लंड एकदम से मेरे सामने आ गया। 

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विशु को मुठ मारते हुए पकड़ा

विशु लोअर ऊपर करने लगा लेकिन मैंने उसे रोक दिया और देर ना करते हुए फ़ौरन उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया। मैं बोली- विशु तेरा लंड तो काफी बड़ा है। 

इतना बड़ा कैसे किया तुमने? विशु कुछ नहीं बोला। वो अपना मुँह को नीचे करके खड़ा था। मैंने कहा- अभी थोड़ी देर पहले तो बहुत हाथ हिलाते हुए कह रहा था रिंकी दीदी रिंकी दीदी। विशु बोला- रिंकी दीदी सॉरी। 

मैंने नाटक करते हुए कहा- तू मेरे बारे में ये सब सोचता है! विशु- सॉरी दीदी गलती हो गयी। मैंने कहा- अच्छा ठीक है। तभी विशु बोला- दीदी मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो। मैंने कहा- अच्छा तो ये बता कि तुझे मेरे में क्या अच्छा लगता है? 

विशु भी मेरे इशारे को समझने लगा था। वो बोला- दीदी आपके बूब्स मुझे बहुत अच्छे लगते है। जब आप चलती हो तो आपकी गांड बहुत मस्त लगती है। मैंने मुस्कुरा कर कहा- अच्छा! वो कुछ नहीं बोला। 

मैंने कहा- तुमने कभी सेक्स किया है? वो बोला- नहीं रिंकी दीदी। मैंने कहा- फिर भी तेरा लंड इतना लम्बा कैसे है? वो बोला- रिंकी दीदी आपको याद करके मुठ मारता हूँ इसलिए ये इतना लम्बा हो गया है। 

ये सब सुनकर मैंने हंसते हुए आराम से उसके गाल पर चपत मारी और बोली- तुझे ये सब करते हुए शर्म नहीं आती? विशु बोला- दीदी प्यार करने में कैसी शर्म। मैंने हंसते हुए कहा- ओह अच्छा … प्यार करता है तू मुझसे! 

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बचने का करने लगी नाटक 

वो बोला- हां रिंकी दीदी। अब देर ना करते हुए मैंने कहा- तो मैं क्या करूं … तुम मुझसे क्या चाहते हो? अब विशु भी पूरी तरह से मेरे मन को समझ गया था कि मैं क्या चाहती हूँ। 

उसने एकदम से बोल दिया- रिंकी दीदी, मैं आपको चोदना चाहता हूँ। मैंने नाटक करते हुए कहा कि तुम पागल हो गए हो क्या? लेकिन विशु अब कहां रुकने वाला था। उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। 

मैं उससे छूटने का नाटक करने लगी। सच में तो मैं भी यही चाहती थी कि विशु के लंड से मैं अपनी चूत की प्यास बुझा लूं। विशु ने अब बिना किसी के डर के अपना काम शुरू कर दिया था। 

उसने मुझे अपनी बांहों में भरके बिस्तर पर पटक दिया; मेरे होंठों को जोर जोर से चूसने लगा। मेरी भी कामुक सिसकारियां निकलने लगी थीं; होंठों की मस्त चुसाई से मेरे मुँह से ‘अई … अई … अई … अह हहह … सीसीई आह आंह …’ के मधुर स्वर निकल रहे थे। 

वो मेरे गले को चूम कर मेरे बूब्स की तरफ बढ़ रहा था। मेरी टी-शर्ट निकाल कर मेरे दोनों दूध को हाथ में भरकर पीने लगा। कुछ देर तक उसने मेरे दोनों चूचों को दबाया। उसके बाद मेरे भूरे निप्पल को काट काट कर पीने लगा। 

उसके दांत मेरे बूब्स के निप्पलों में गड़ रहे थे। मेरी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने भी कुछ देर तक उसको अपना दूध पिलाया। मेरे मुँह से ‘अईअई … अईअई … चूस ले इसस् … उहह्ह्ह …’ की आवाज निकल रही थी। 

उसके बाद मैंने उससे खुद को छुड़ाकर अलग किया और उसका लोअर निकाल दिया। मुझे उसके लंड से खेलने का बेसब्री से इन्तजार था। 

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