विधवा भाभी की मस्त चुत – 1 

नमस्कार दोस्तो, मैं प्रवीण कुमार एक बार फिर से अपनी पड़ोस की विधवा भाभी नम्रता के साथ मस्ती भरी फ्री भाभी सेक्स कहानी को लेकर हाजिर हूँ हमारे पड़ोस में एक भाभी रहती हैं, जो कि बहुत ही खूबसूरत महिला हैं। 

अगर आप उनको देखोगे तो आपका लंड तुरंत ही हरकत करना शुरू कर देगा। भाभी जबसे शादी होकर आई थीं, तब से हमारे मोहल्ले के सभी लड़के की नीयत भाभी पर डोल रही थी कि किसी तरह भाभी को एक बार चोदने का मौका मिल जाए। 

मैं भी उन लड़कों में से एक था। भाभी को इन सब बातों का अहसास था कि मोहल्ले के सभी लड़के उनको वासना भरी नजरों से देखते हैं लेकिन भाभी किसी को भाव ही नहीं देती थीं। वे अपने पति में ही खुश थीं। 

भाभी की शादी के 2 साल बाद ही अचानक उनके पति का निधन हो गया। अब भाभी पर घर की जिम्मेदारी उठाने की आन पड़ी थी। भाभी के परिवार में उनके बूढ़े सास-ससुर और उनका 5 माह का लड़का था। 

घर के सभी लोगों की जिम्मेदारी भाभी पर आ गई थी। अपनी सभी जिम्मेदारियों के बारे में सोचकर भाभी काफी उदास रहने लगी थीं और उनकी यह उदासी मुझे देखी नहीं जा रही थी।

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सेक्सी भाभी की करि मदद

इसलिए एक दिन बड़ी हिम्मत करके मैं भाभी के घर गया और उनको समझाने की कोशिश की- जो हो गया, उसके बारे में ज्यादा मत सोचो। अब आपको ही अपने बच्चे और बूढ़े सास ससुर को सम्भालना है। 

आप इस तरह से उदास रहोगी, तो आप अपने घर को कैसे सम्भाल पाओगी? मेरी इस बात पर भाभी ने कहा- लगता है इस मोहल्ले में सिर्फ आपको छोड़कर कोई भी इंसान है ही नहीं। 

आप ही पहले इंसान हो, जो मेरी तकलीफ में मुझे समझाने आए हो। पर मैं क्या कर सकती हूं। क्या आप मुझे कुछ काम दिला सकते हो? मैंने कहा- ठीक है भाभी। 

मैं एक दो दिन में आपके लिए काम ढूंढ कर आपको बताता हूँ। फिर मैं अपने घर जाते वक्त भाभी को 2000 रू देना चाह रहा था मगर भाभी ने मना करना शुरू कर दिया। 

मैंने जबरदस्ती भाभी के हाथ को पकड़कर उनके हाथ में रूपए थमा दिए और कहा- अगर आपको कोई भी काम हो या आपको कुछ चाहिए हो … तो आप मुझे बिना हिचकिचाहट के बोल देना। 

भाभी ने कहा- ठीक है प्रवीण। मैं वैसे भी अब आपके सिवाए किसको बोल सकती हूं। आप ही तो इस पूरे मोहल्ले में एक ऐसे इंसान हैं, जो मेरी दुख और तकलीफ समझ रहे हैं और मेरी मदद करने आए हैं। 

बाकी लोगों को तो मेरी तकलीफ दिखाई ही नहीं दे रही है। इसके बाद भाभी ने मेरा मोबाइल नम्बर मांग लिया। मैंने भी झट से भाभी को अपना नम्बर दे दिया और घर आ गया। 

मैं उस दिन अपने ऑफिस चला गया और ऑफिस जाते ही मैंने भाभी की सारी दास्तान अपने सर को सुना दी। भाभी की सारी बातों को मेरे मुँह से सुनने के बाद सर ने भाभी को काम देने का निर्णय कर लिया और उन्हें तुरंत ही बुलाने का कह दिया। 

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भाभी करने लगी मेरे साथ काम 

मैंने भाभी को कॉल करके बताया कि मेरे सर आपको अभी मेरे ऑफिस में बुला रहे हैं। भाभी के पास मेरे ऑफिस आने का कोई साधन नहीं था, तो मैं ही बाइक लेकर उनके घर पहुंच गया। 

तब तक भाभी तैयार हो गई थीं। मैं भाभी को अपनी बाइक पर बिठाकर सीधा अपने ऑफिस लेकर आ गया। इसके बाद सर और भाभी की कुछ देर तक बात हुई। भाभी को सर ने दूसरे दिन से काम में आने को बोल दिया। 

अब भाभी काफी खुश थीं कि उनको कुछ काम तो मिल गया। भाभी काम मिलने की खुशी में मुझे बार बार धन्यवाद दे रही थीं। मैंने भी अब भाभी के साथ मजाक करते हुए बोल दिया। 

भाभी आपके लिए तो आपका देवर कुछ भी कर सकता है, आप बोलो तो सही … ये नौकरी तो बहुत छोटी सी बात है। भाभी ने हंस कर कहा- जो आपने मेरे और मेरे परिवार के लिए किया है, उसके लिए मैं आपकी सदा के लिए आभारी रहूंगी। 

बस एक बात और है कि आप ऑफिस आएंगे, तो मुझे भी अपनी बाइक में बैठाकर लेकर आना जाना तय कर लीजिए। मैंने कहा- हां ठीक है न भाभी। अब दूसरे दिन से भाभी और भाभी के 5 माह का बच्चा एक साथ ऑफिस जाने लगे। 

हम दोनों एक साथ ऑफिस से वापस घर आते थे। धीरे-धीरे भाभी अपने पति का गम भूलने लगी थीं। मैं भी भाभी को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करने में लग गया था कि भाभी कैसे भी करके मुझको पसंद करना शुरू कर दें।

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